Saturday, February 6, 2010

जीएम फसलों का जिन्न-देविंदर शर्मा

जीएम फसलों का जिन्न


http://in.jagran.yahoo.com/news/opinion/general/6_3_6156970.html

कई साल पहले पीएन हक्सर ने एक साक्षात्कार में मुझसे कहा था कि बांधों में गाद जमने के जो भी अनुमान वैज्ञानिकों ने लगाए थे वे गलत साबित हुए। उन्होंने केंद्रीय जल आयोग की एक रिपोर्ट दिखाई जिसमें बताया गया था कि बांधों में जमने वाली गाद शुरू में लगाए गए अनुमान से औसतन पांच सौ गुना अधिक है। इसीलिए बांधों का जीवनकाल अनुमान से काफी कम है और सिंचाई व्यवस्था के सभी अनुमान भी ध्वस्त हो गए हैं। कृषि वैज्ञानिक भी समय-समय पर उपज का पूर्वानुमान लगाते हैं, जो अकसर लक्ष्य तक नहीं पहुंच पाते। उपज के अलावा पैदावार और उत्पादकता के पूर्वानुमान भी सही साबित नहीं हो रहे हैं। हाल ही में अधिकांश अध्ययनों में जीएम फसलों के पराग कणों के हवा में उड़ने और अन्य प्रजातियों के साथ इनके क्रास परागण के संबंध में किए गए सभी अनुमान गलत साबित हुए हैं। आनुवांशिकीय संवर्धित फसलें जैसे बीटी काटन में मिट्टी से एक बैक्टीरिया को बीज में प्रत्यारोपित किया जाता है। यह जीन काटन के पौधे को विषैला बना देती है। जब कीट इस पौधे को खाते हैं तो वे मर जाते हैं। इस जीन का वाहक पराग हवा में उड़कर या फिर मधुमक्खी जैसे पतंगों द्वारा पड़ोस में काटन की अन्य सामान्य प्रजातियों में पहुंचकर क्रास परागण कर देता है। अन्य प्रजातियों के संपर्क विकार का महत्व बीटी बैगन के लंबित व्यावसायिक अनुमति के संदर्भ में बढ़ जाता है। आमतौर पर बैगन क्रास परागण फसल है। क्रास परागण का अंश 5 से 48 प्रतिशत तक रहता है। जीएम पौधों का परागन सामान्य प्रजातियों से होने से ऐसी खरपतवार फैल सकती है, जो रासायनिक खरपतवार नासक से भी नियंत्रित नहीं होगी। इन्हें सुपर खरपतवार कहा जाता है।

परंपरागत रूप से किसान खरपतवारों के दैत्य से संघर्ष कर रहे हैं, किंतु नई उभरती सुपर खरपतवार इतना बड़ा खतरा है, जिसके बारे में कल्पना भी नहीं की जा सकती। इन्हें किसी भी रासायनिक कीटनाशक से नियंत्रित नहीं किया जा सकता। उदाहरण के लिए, गेहूं में किसानों को मांदुसी खरपतवार मिली, किंतु खरपतवार नाशक का छिड़काव कर इन पर अंकुश लगाया जा सकता है। यद्यपि ये खरपतवार नाशक खासे महंगे हैं और किसानों की लागत बढ़ा देते हैं, किंतु फिर भी किसानों के पास मांदुसी को नष्ट करने का उपाय तो है ही। कल्पना करें अगर गेहूं के खेत में ऐसी खरपतवार आ जाए जिसे किसी भी रसायन से नष्ट न किया जा सके। ऐसी खरपतवार खेतों को बंजर बना देगी। अमेरिका के बहुत से क्षेत्रों में ठीक यही हो रहा है। इसके प्रति भारत के किसानों को चिंतित रहने की आवश्यकता है। वैज्ञानिक आपको बताएंगे कि जीएम फसलों से कोई सम्मिश्रण व विकार नहीं होता, लेकिन यह सच नहीं है। दक्षिण अमेरिका के जार्जिया प्रांत में एक लाख से अधिक एकड़ जमीन पिगवीड नामक एक नई खतरनाक खरपतवार से बंजर हो गई है। यह खरपतवार अन्य प्रांतों, जैसे साउथ केरोलिना, नार्थ केरोलिना, अरकनसास, केंटुकी और मिसूरी में भी फैल चुकी है। इससे इतना विनाश हुआ कि जार्जिया की मेकन काउंटी में दस हजार एकड़ से अधिक भूमि पर किसानों ने खेती करना बंद कर दिया। दूसरे शब्दों में जार्जिया प्रांत तेजी से बंजर प्रदेश में बदलता जा रहा है। यूनिवर्सिटी आफ जार्जिया के स्टेनली कल्पेपर का कहना है कि पिछले साल हमने अपने बुरी तरह प्रभावित खेतों में से 45 फीसदी खर-पतवार खुद अपने हाथों से हटाई है। इस सुपर खरपतवार ने खतों पर तब कब्जा किया जब किसानों ने मोंसेंटो कंपनी की जीएम सोयाबीन और जीएम काटन फसल उगाई। भारत में जीएम सम्मिश्रण का खतरा काफी गंभीर है क्योंकि यहां खेतों का आकार बहुत छोटा है और खेत एकदूसरे से मिले हुए हैं।

भारत में भी वैज्ञानिक सुपर खरपतवार के हमले की आशंका से इनकार कर रहे हैं। विडंबना यह है कि अमेरिका का कृषि विभाग भी बड़े पैमाने पर संकर विकार से इनकार कर रहा है। अब तक 28 देशों में सुपर खरपतवार फैल चुकी है, जहां जीएम फसलों की खेती होती है। इनके प्रभाव में आकर 30 से अधिक ऐसी खरपतवार जिन्हें पहले काबू करना संभव था, अब अनियंत्रित सुपर खरपतवारों की श्रेणी में शामिल हो चुकी हैं। यहां तक कि अमेरिका में अदालत ने बहुराष्ट्रीय कंपनी बायर क्राप साइंसेज को मिसूरी के दो किसानों को 20 लाख डालर का जुर्माना अदा करने का आदेश दिया, जिनकी धान की फसल प्रायोगिक जीएम फसलों की चपेट में आकर बर्बाद हो गई थी। यद्यपि मुख्य रूप से धान स्वत: परागण होने वाली फसल है, यानी इसका परागण पांच प्रतिशत से भी कम होता है, फिर भी अमेरिका की अदालतों में बहुराष्ट्रीय कंपनियों के खिलाफ क्रास परागण के एक हजार से अधिक मामले लंबित पड़े हैं। वहां जीएम फसलों का सामान्य फसलों पर पड़ने वाले प्रभाव के कारण करीब छह हजार करोड़ रुपए का नुकसान हो चुका है। इस संबंध में बायर क्राप साइंसेज ने स्वीकार किया है कि जीएम फसलों का सामान्य फसल में परागण रोकने के उसके सारे प्रयास विफल हो गए हैं। दुर्भाग्य से भारत में जीएम फसलों के कारण सामान्य फसल प्रभावित होने पर कंपनियों के खिलाफ जुर्माने की कोई व्यवस्था नहीं है।

गुजरात, महाराष्ट्र और उत्तार प्रदेश में बीटी बैगन की अवैध खेती जोरो पर हो रही है। पर्यावरण और वन मंत्रालय के साथ-साथ कृषि मंत्रालय ने भी इस ओर से आंखें मूंद रखी है। ये जीएम फसलें मानव स्वास्थ्य, कृषि और पर्यावरण के लिए गंभीर खतरा हैं। किसानों को अपने हितों की सुरक्षा के उपाय करने होंगे। साथ ही सरकार को भी तत्परता से कदम उठाने होंगे और अवैध रूप से जीएम फसलों की खेती करने तथा इससे सामान्य प्रजातियों के प्रभावित होने पर जिम्मेदार कंपनियों के खिलाफ आर्थिक जुर्माना लगाना होगा।

[देविंदर शर्मा: लेखक कृषि एवं खाद्य मामलों के जानकार हैं]


1 comment:

紅包 said...

天下沒有走不通的路,沒有克服不了的困難,沒有打不敗的敵人。 ..................................................